चचेरे भाई से सीलपैक चूत का उद्घाटन करवाया

दोस्तो, मेरा नाम वृत्ति चौधरी है।
मैंने पहले भी कहा था—मेरा मकसद सिर्फ असली कहानियाँ यहाँ लाना है। काल्पनिक वाली नहीं। मेरी सहेलियाँ बहुत चुदक्कड़ थीं, और उनकी सच्ची कहानियाँ ही मैं यहाँ लाती हूँ।

आज की कहानी मेरी स्कूल फ्रेंड सरोज कासवान और उसकी छोटी बहन आरती कासवान की है। दोनों बहनों ने एक ही दिन, एक ही आदमी—अपने चचेरे भाई गोविंद चौधरी—से अपनी सीलपैक चूत का उद्घाटन करवाया था।

अब आगे की कहानी खुद सरोज की जुबानी…


दोस्तो, मैं सरोज कासवान। आज उम्र 30 साल है, लेकिन ये कहानी 9 साल पुरानी है। तब मैं 21 की थी और आरती 19 की।

बाड़मेर के गाँव की ढाणी में रहते थे हम। घर दूर-दूर। पापा बाहर जॉब पर, भाई भी ज्यादातर बाहर। घर में बस मम्मी, मैं और आरती।

सहेलियाँ सब किसी-न-किसी से चुदवा चुकी थीं। मैं और आरती अभी तक कुँवारी। रात को एक-दूसरे की चूत में उँगली करतीं, बूब्स मसलतीं, घोड़ी बना-बनाकर खेलतीं… लेकिन असली लंड का नशा नहीं मिला था। मन में आग सुलगती रहती।

सबसे नजदीक चाचा का घर—सिर्फ एक किलोमीटर। चाचा-चाची दोनों टीचर। उनका बेटा गोविंद… मेरा लाड़ला भाई। बचपन से साथ खेले, साथ सोए, दूल्हा-दुल्हन का खेल खेला। कभी-कभी वो हमें घोड़ी बनाकर धक्के भी लगाता था, लेकिन तब सब नॉर्मल लगता था।

अब हालत बदल चुकी थी। सहेलियों ने सलाह दी—“भाई से ही करवा ले। इतना प्यार करता है, मना नहीं करेगा।”

मौका खुद आकर खड़ा हो गया।

मम्मी नानी के देहांत पर तीन-चार दिन के लिए ननिहाल चली गईं। जाने से पहले गोविंद से बोलीं—“रात को यहीं सोना। लड़कियाँ अकेली हैं।” गोविंद मान गया।

मम्मी गईं तो मैंने आरती से कहा—“आज मौका है। गोविंद को पटा लेते हैं।”
आरती ने आँखें चमकती हुई कहा—“तू पहले शुरू कर। मैं बाद में आ जाऊँगी।”

शाम को गोविंद आया। मैंने टाइट जींस और टॉप पहना था—32 के बूब्स साफ उभर रहे थे, कमर तक खुले बाल। आरती ने गुलाबी सलवार-सूट डाला था।

गोविंद की नज़रें मेरी छाती पर अटक गईं। मैंने महसूस कर लिया—आज काम बन सकता है।

रात को तीनों एक कमरे में सोए। बीच के पलंग पर गोविंद, एक तरफ मैं, दूसरी तरफ आरती।

टीवी देखते-देखते गोविंद मेरी गोदी में सिर रखकर सो गया… या सोने का नाटक किया। मैंने जानबूझकर अपना पैर उसके पैर पर रगड़ना शुरू किया। फिर हाथ उसके लंड पर रख दिया।

लंड पत्थर की तरह कड़ा था। करीब 8 इंच लंबा और मोटा।

मैं धीरे-धीरे सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद उसने भी मेरी छाती पर हाथ रख दिया। मसलने लगा। फिर हाथ नीचे सरकाया… जींस के बटन खुद नहीं खुले तो मैंने करवट बदलकर खुद खोल दिए और जिप नीचे सरका दी।

उसने अंडरवियर के अंदर हाथ डाल दिया। मेरी चूत पहले से गीली थी।
“पूरी उतार दे…” मैंने फुसफुसाया।

मैंने खुद जींस और पैंटी घुटनों तक खिसका दी। गोविंद ने मेरी चूत सहलानी शुरू की। मैंने उसकी पैंट नीचे की और लंड पकड़ लिया।

फिर दोनों एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। कपड़े उड़ने लगे। ब्रा, चड्डी, सब फर्श पर।

गोविंद मेरे 32 के गोल बूब्स मुँह में लेकर ऐसे चूस रहा था जैसे सालों से भूखा हो। मैंने भी उसकी बनियान और चड्डी उतार दी। अब दोनों पूरी तरह नंगे।

उसने लंड पर थूक लगाया, मेरे नीचे तकिया रखा और अपने मोटे लंड को मेरी सीलपैक चूत के मुँह पर सेट किया।

पहला धक्का… सिर्फ दो इंच घुसा। दर्द ऐसा कि आँखों में आँसू आ गए।
“रुक… दर्द हो रहा है…”

वो रुक गया। फिर दूसरा झटका—चार इंच। तीसरा—पूरा लंड अंदर समा गया। मेरी चीख निकल गई।

आरती जाग गई थी, लेकिन सोने का नाटक कर रही थी। उसे पता था आज का दिन आने वाला है।

गोविंद ने दस मिनट जोर-जोर से पेलकर मेरी चूत में ही झड़ गया। फिर दूसरे राउंड में और भी जबरदस्त चोदा। उस रात कुल चार राउंड किए। मेरी चूत फटी हुई थी, दर्द असहनीय था, लेकिन मजा भी उतना ही गहरा।

सुबह 5 बजे आरती दूध निकालने गई। मैंने गोविंद का लंड मसलकर खड़ा किया और खुद ऊपर बैठकर उछलने लगी। आरती वापस आई तो मुझे नंगी हालत में लंड पर नाचते देख शरमा गई।

मैंने कहा—“आ जा तू भी।”

गोविंद ने उसी सुबह आरती की भी कुँवारी चूत फाड़ी। दो राउंड उसके साथ, एक मेरे साथ।

उसके बाद हम तीनों नंगे बैठकर चाय पीने लगे।

पूरे दिन नंगे रहे। नहाते समय भी एक-एक राउंड किया। दोपहर को फिर दो राउंड। शाम को आमरस पीकर एनर्जी वापस आई तो फिर दोनों बहनें उसके लंड पर बैठ-बैठकर उछलने लगीं—प्रतियोगिता हो गई कि कौन ज्यादा देर तक चुदवाएगी।

दूसरे दिन सुबह गोविंद ने आरती को घोड़ी बनाकर चोदा। फिर मुझसे बोला—“गांड भी मारनी है।”
मैंने कहा—“मार लो।”

मेरी गांड बहुत टाइट थी। दर्द दोनों को हुआ, लेकिन मजा भी उतना ही।

चार दिन तक लगातार… चूत और गांड दोनों छेदों को गोविंद ने खूब चौड़े किए।

तीन साल तक ये सिलसिला चला। शादी के बाद आरती ने बंद कर दिया, लेकिन मैं जब भी मायके जाती हूँ, गोविंद आज भी मेरी चूत और गांड जरूर मारता है। कहता है—“तेरी गांड और फिगर अभी भी वैसी ही मस्त है।” मैं मना नहीं करती।

हम तीनों के अलावा इस रिश्ते को दुनिया में कोई नहीं जानता।


दोस्तो, बताओ…
सरोज की ये हॉट वर्जिन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी कैसी लगी?

By Admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *