यहाँ आपकी कहानी का सुव्यवस्थित और प्रवाहपूर्ण रीफ्रेज़्ड संस्करण है:
मेरे प्यारे दोस्तो, कैसे हो आप सब?
आशा करती हूँ सब स्वस्थ और खुश होंगे। मेरी प्यारी बहनें समय से अपनी चूत चुदवा रही होंगी और मेरे प्यारे भाई समय से चूत मार रहे होंगे!
थोड़ा अपने बारे में बता दूँ। मेरा नाम दिव्या वरयानी है। मैं चालीस साल की शादीशुदा औरत हूँ। मेरा जिस्म 38-34-44 है। इस नाप से आप अंदाज़ा लगा सकते हो कि मैं कितनी गदराई और भरी-पूरी हूँ। जब मैं चलती हूँ तो मेरे चूतड़ और चूचे साफ हिलते हैं। लोग आँखें फाड़-फाड़कर घूरते हैं—और घूरें भी क्यों न, इतना भरा जिस्म है मेरा!
अब सीधे छोटी लंड वाली कहानी पर आती हूँ।
यह बात तीन-चार साल पुरानी है। मेरे और मेरे पति देवराज की ज़िंदगी उस समय काफी अच्छी चल रही थी। हमारी दो बेटियाँ हैं—बड़ी जूही और छोटी खुशी। दोनों टीनएज में हैं और बॉडी में दोनों मुझ पर ही गई हैं। घर में मेरे पति, दोनों बेटियाँ और सास-ससुर रहते हैं।
रात का समय था। सब खाना खा रहे थे। खाने के बाद हर कोई अपने-अपने कमरे में सोने चला गया। मैंने भी घर का काम खत्म किया और अपने कमरे में आई। उस वक्त मैंने कसी हुई लेगिंग्स और सूट पहना हुआ था।
जैसे ही मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद किया, राज ने मुझे पीछे से दबोच लिया।
मैं बोली, “अरे! क्या कर रहे हो? ठीक से अंदर तो आने दो!”
राज बोले, “मेरी जान, तुम्हारी यह गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जाता!”
मैं मुस्कुराई, “अच्छा जी?”
राज ने मुझे अपनी तरफ़ घुमाया और मेरे होठों को चूसने लगे। मैं भी उनका साथ देने लगी। चूमते-चूमते वे मुझे बिस्तर तक ले गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने मेरा सूट और लेगिंग्स उतार दी। मैं रात में अंदर से नंगी ही सोती हूँ, इसलिए जल्दी पूरी नंगी हो गई। मैंने भी राज के सारे कपड़े निकाल फेंके।
राज ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। मैं गिरी तो वे मेरे ऊपर आ गए और मेरे चूचों को दबाते हुए चूमने लगे। मैं भी उनके साथ बह गई—
“उह्ह… उह्हह्ह… ओह्ह्ह… राज बेबी, आई लव यू!”
चूमने की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगीं। फिर राज ने मेरे होठों को छोड़ा और मेरे चूचों पर टूट पड़े। उन्हें मसलते और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे। मैं उनके बालों को सहलाती हुई आहें भरने लगी—
“उम्मम्म… सीससीसी… उमम्म… ओह गॉड… आह्ह… राज प्लीज़ काटो मत… दर्द हो रहा है!”
राज मेरे चूचों को बुरी तरह चूसते रहे। फिर वे मेरी टाँगों के बीच आए, जाँघों पर चाटने लगे और धीरे-धीरे मेरी चूत के करीब पहुँचे। जैसे ही उनका मुँह चूत के पास आया, मैंने उनका सिर पकड़कर चूत में दबा दिया।
वे गुस्से में मुझसे अलग हो गए।
मैं बोली, “क्या हुआ? चाटो ना प्लीज़!”
राज बोले, “तुम्हें पता है दिव्या, मुझे वहाँ चाटना बिल्कुल पसंद नहीं। पूरा मूड खराब कर दिया तुमने!”
मैंने सॉरी कहा, लेकिन वे बोले, “अब नहीं करना।”
मैं तो अब गरम हो चुकी थी। मैंने राज को लिटाया और उनके टाँगों के बीच जाकर उनका छोटा लंड चाटने लगी। वे हटाने लगे, पर मैं नहीं हटी। मैंने उनका स्मॉल डिक मुँह में भरा और चूसने लगी। दो मिनट बाद ही राज ने मेरा सिर पकड़कर अंदर धकेलना शुरू कर दिया। मैं उनकी आँखों में देखते हुए तेज़ी से चूसती रही।
पाँच मिनट बाद उन्होंने मुझे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया। वे मेरी टाँगों के बीच आए, चूत पर थूका और अपना लंड रगड़ने लगे। मैंने टाँगें फैला दीं और कहा—
“ओह्ह… राज प्लीज़ डाल दो अब! जल्दी… रहा नहीं जा रहा… फक मी बेबी!”
राज ने बिस्तर के दोनों तरफ़ हाथ रखे और एक ज़ोरदार धक्का मारकर अपना पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मैंने उनकी कमर पर टाँगें लपेट लीं। वे मेरे ऊपर लेटकर तेज़ी से चोदने लगे।
“आह्ह… आआ ह्हह… उह्ह… म्म्मम्म… सीससीसी… आह्हह्… चोदो राज… और तेज़ चोदो!! बहुत मज़ा आ रहा है… करते रहो!! बेबी चोदो मुझे!!”
राज भी आहें भरते हुए बोले, “आआह… मेरी रंडी बीवी, कितनी आग है तेरी चूत में!! साली ले मेरा लंड, छिनाल!”
मैं भी गांड उठा-उठाकर उनका साथ दे रही थी। करीब दस मिनट बाद राज मेरी चूत में झड़ गए और साइड में गिरकर लेट गए।
राज मेरी प्यास कभी पूरी तरह नहीं बुझा पाते। पर मैंने कभी उनसे यह बात नहीं कही और न कभी बाहर किसी और के बारे में सोचा। बस उँगली करके खुद को शांत कर लेती और सो जाती। उस दिन भी वही हुआ। मैंने चूत में उँगली की, खुद को शांत किया और नंगी ही उनके साथ सो गई।
अगली सुबह आँख खुली तो राज बगल में नहीं थे। मैंने सोचा शायद बाथरूम में होंगे, पर वहाँ भी नहीं मिले। मैं नहाने चली गई। नहाकर तौलिया लपेटे बाहर आई और अलमारी से कपड़े निकालने लगी। मेरी एक फेवरिट ड्रेस सामने पड़ी थी। जैसे ही मैंने उसे निकाला, नीचे से एक पैक्ड गिफ्ट बॉक्स और एक पर्ची गिर पड़ी।
पर्ची में ग्रीटिंग कार्ड था। राज ने लिखा था—“Happy Birthday Sweetheart” और नीचे—“यह तुम्हारा पहला गिफ्ट है, अकेले में खोलना।”
मैं खुश हो गई। गिफ्ट खोला तो अंदर 12-13 इंच का डिल्डो और एक वाइब्रेटर निकला। मैं शॉक में रह गई, फिर बहुत खुश हुई। तभी राज की कॉल आ गई। उन्होंने बर्थडे विश किया। मैंने थैंक यू कहा। असल में मुझे खुद याद नहीं था कि आज मेरा जन्मदिन है।
राज ने पूछा, “गिफ्ट कैसा लगा?”
मैंने कहा, “बहुत अच्छा बेबी!”
वे बोले, “यूज़ करके देखो!”
मैंने कहा, “अभी नहीं, बाद में।”
वे बोले, “जो ड्रेस चुनी है, वही पहनना आज।” और कॉल काट दी।
मैंने ब्लू ब्रा-पैंटी का सेट पहना और वही ड्रेस पहन ली। काफी समय बाद पहन रही थी, इसलिए थोड़ी कसी हुई लग रही थी, पर उसमें मेरी बॉडी अच्छी दिख रही थी।
नीचे पहुँची तो सबने मुझे विश किया। नाश्ता बनाकर सबके साथ खाया। बड़ी बेटी जूही मिल्क और प्रोटीन लेकर जिम चली गई। छोटी बेटी अपने कमरे में चली गई। ससुर रोज़ की तरह टहलने निकल गए। सास हॉल में टीवी देखने लगीं और मैं घर का काम करने लगी।
थोड़ी देर बाद दरवाज़े की घंटी बजी। बाहर हमारा नौकर रमेश खड़ा था। उसने नमस्ते किया।
मैंने पूछा, “अरे रमेश, आज इतनी देर क्यों लगा दी?”
वो बोला, “मालकिन, आज बीवी को हॉस्पिटल ले गया था।”
मैंने पूछा, “सब ठीक है न? तू आया ही क्यों जब बीवी बीमार है?”
वो बोला, “बस थोड़ा पेट दर्द था, अब ठीक है।”
मैंने कहा, “ठीक है, अंदर आ जा।”
रमेश किचन में मेरे साथ काम करने लगा। जल्दी सारा काम खत्म हो गया। मैं अपने कमरे की तरफ़ जाने लगी तभी सास ने रमेश से कहा, “अरे रमेश, काम हो गया तो मेरे कमरे में आकर पैरों की मालिश कर दे।”
वो बोला, “ठीक है बड़ी मालकिन, तेल लाता हूँ।”
मैंने कहा, “माँ जी, मैं कर दूँ मालिश?”
सास बोलीं, “नहीं बहू, रमेश कर देगा। इससे हाथों को आराम मिल जाता है।”
मैं अपने कमरे में आ गई। दरवाज़ा बंद किया और राज का दिया गिफ्ट लिया। बेड पर बैठकर राज को कॉल की, पर उन्होंने कॉल कट कर दी। मैं अन्तर्वासना की साइट खोलकर कहानी पढ़ने लगी। पढ़ते-पढ़ते गरम हो गई। ड्रेस उतारी और ब्रा के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगी। धीरे-धीरे मदहोश होती गई।
फिर सोचा ऑडियो कहानी सुन लूँ। एयरबड्स लगाए और कहानी चला दी। फोन साइड रखकर चूचियाँ प्रेस करने लगी। दस मिनट बाद वाइब्रेटर उठाने ही वाली थी कि राज की कॉल आ गई।
उन्होंने पूछा, “क्या कर रही थी?”
मैंने कहा, “तुमने कॉल नहीं उठाया, इसलिए कहानी सुनते हुए चूचे प्रेस कर रही थी।”
राज बोले, “नाश्ता करा दिया सबको?”
मैंने हाँ कहा।
फिर बोले, “मम्मी को दवाई दे दी?”
तभी मुझे याद आया—ओह शिट! दवाई देना भूल गई।
राज बोले, “जाओ, अभी जाकर दो।”
मैं कॉल काटकर भागती हुई नीचे गई। दवाई और पानी की बोतल लेकर सास के कमरे की तरफ़ बढ़ी। दरवाज़ा अंदर से बंद था। अंदर से सास की आवाज़ें आ रही थीं। मुझे शक हुआ। दबे पाँव खिड़की के पास गई और जो देखा, उससे दंग रह गई।
अंदर सास और रमेश दोनों नंगे बिस्तर पर थे। रमेश ने सास को घोड़ी बना रखा था और पीछे से चोद रहा था। सास आहें भर रही थीं—
“आआह्ह… रमेश… मेरे राजा! कितना मोटा लंड है तेरा… पूरा जिस्म खोल देता है!! आह्हह्ह… रमेश चोद मुझे… और तेज़… और तेज़!!”
रमेश बोला, “आह्हह… बड़ी मालकिन, इस उम्र में भी कितना गदराया जिस्म है आपका!! आपको चोदकर मज़ा आ जाता है!!”
सास चीख रही थीं, “आह्ह… रमेश मेरी जान… चोद मुझे अपने बड़े लंड से!! बुझा दे मेरी सारी प्यास!! मेरी गांड मार… फाड़ दे मेरी फुड्डी!!”
रमेश ने चूत से लंड निकाला और सास की गांड में डाल दिया। मैंने रमेश का लंड देखा—हाय राम! इतना लंबा, इतना मोटा!!
मेरी चूत तुरंत गीली हो गई। उसके लंड को देखते ही पानी छोड़ने लगी। मैंने ड्रेस उठाकर अंदर हाथ डाला और पैंटी के ऊपर से सहलाने लगी।
उफ्फ… यह रमेश का लंड देखकर मेरी चूत क्यों गीली हो रही है? कहीं सच में मुझे उसका लंड पसंद तो नहीं आ गया? क्या मैं इसे अपनी चूत में लेना चाहती हूँ?
मेरा हाथ चूत पर चलने लगा। मैं खुद से लड़ रही थी—नहीं! मैं ऐसा नहीं सोच सकती। अपने पति को धोखा कैसे दे सकती हूँ? किसी गैर मर्द का लंड मुझे क्यों पसंद आएगा?
पर मेरी चूत कुछ और ही कह रही थी।
तभी सास की आवाज़ ने मुझे होश में लाया। रमेश सास की गांड के ऊपर चढ़ चुका था और झड़ रहा था। मैं खुद को संभालकर वहाँ से हट गई। नॉर्मल होकर दरवाज़ा खटखटाया। रमेश ने दरवाज़ा खोला। अंदर सास कपड़े पहनकर लेटी हुई थीं।
मैंने कहा, “मम्मी जी, आपकी दवाई…”
वे बोलीं, “अरे हाँ, भूल ही गई थी। रमेश, बहू से ले ले।”
रमेश ने दवाई ली। मैंने कहा, “अभी खा लेना,” और वहाँ से चली आई।
अपने कमरे में आकर दरवाज़ा लॉक किया। ड्रेस उतारी, ब्रा-पैंटी में हो गई और चूचियाँ दबाने लगी। आँखें बंद हो गईं। आँखों के सामने रमेश का लंबा मोटा लंड घूमने लगा। दूसरा हाथ पैंटी में घुस गया और मैं चूत सहलाने लगी—
“उह्ह… दिव्या तू पागल हो गई है! किसी गैर मर्द का लंड तुझे कैसे पसंद आ सकता है? वो तेरा नौकर है!!”
पर दिमाग में उसका लंड घूमता रहा और हाथ तेज़ी से चलने लगे। मैं अपना आपा खो बैठी—
“आआह्ह… आआह्… ओह्ह… रमेश मेरी चूत… रमेश चाटो मेरी चूत!! रमेश तुम बहुत अच्छे नौकर हो!! चाटो अपनी दिव्या मालकिन की चूत!!”
मैंने ड्रॉअर से वाइब्रेटर निकाला, पैंटी नीचे की और चूत पर रगड़ने लगी। जैसे ही ऑन किया, तेज़ वाइब्रेशन शुरू हो गया। मैं पागल-सी हो गई—
“आआह… आअह्ह… आह्ह… उफ… सीसीसी… म्म्म्मम… आआह्ह… मेरी चूत… रमेश चोदो! रमेश चोदो मुझे!”
एक हाथ से चूची कसकर दबाती रही—
“आआह्ह… रमेश मैं बहुत प्यासी हूँ! जोर से बुझा दो मेरी चूत की सारी प्यास!! बहुत बड़ा लंड है तुम्हारा!!”
मैंने ड्रॉअर से डिल्डो भी निकाल लिया। वह चिपकने वाला था। दीवार पर चिपकाया, ब्रा-पैंटी उतारकर पूरी नंगी हो गई। डिल्डो को चूत पर रगड़ा, वाइब्रेटर चूचियों पर फिराने लगी। फिर धक्का मारकर डिल्डो अंदर ले लिया—
“आआह्ह ह्ह…” एक अलग-सा सुकून मिला।
मैं आगे-पीछे होने लगी—
“आअह्ह… रमेश चोदो मुझे मेरे राजा!! तुम्हारे साहब का लंड बहुत छोटा है… वो जल्दी झड़ जाते हैं!! तुम्हारी दिव्या मालकिन बहुत प्यासी है!! ओह्ह्… जोर से चोदो मुझे!! बहुत मज़ा आ रहा है!!”
तेज़ी से डिल्डो अंदर-बाहर करने लगी। फिर घूमकर घोड़ी बन गई, चूत में डिल्डो घुसाए रखकर वाइब्रेटर चूसने लगी—
“उम्म्म… सीसीसी… आह्ह… आआह्ह… ऊऊ… रमेश चोदो… चोदो… चोदो!! येस्स… येस्स… येस्स!! रमेश बेबी यू फक मी सो हार्ड!! फक माय वेट पुसी बेबी!! येस्स रमेश!!”
मेरी जाँघें काँपने लगीं और चूत से पानी बह निकला—
“ओह्ह गॉड… आआह्हह्ह… येस्स!!”
मैं झड़कर बिस्तर पर गिर गई। सारा सामान वापस रखा और कब सो गई, पता ही नहीं चला।
तो दोस्तो, यह थी आपकी प्यारी भाभी दिव्या की छोटी लंड वाली कहानी।
आपको कैसी लगी? ज़रूर बताना।
आगे की कहानी की प्रतीक्षा करें।
धन्यवाद।