हॉट रंडी आंटी की चुदाई – ट्रेन वाली सुमन – Hindi Sex Stories

Hindi Sex Stories दोस्तो, मेरा नाम करन है। मुजफ्फरनगर का हरामी हूँ। ये कहानी कुछ साल पुरानी है जब मैं एक प्यासी रंडी आंटी को ट्रेन में फँसाकर उसकी चूत और गाँड़ दोनों फाड़ चुका था।

मुझे ट्रेन में घूमने का शौक था। उन दिनों शाहदरा में रहता था। एक दिन देहरादून जा रहा था जनरल डिब्बे में। गाजियाबाद से एक आंटी चढ़ी और सीधे मेरे बगल में आ बैठी। मैंने कनखी से देखा तो लंड तन गया। क्या मस्त रंडी थी साली! बड़े-बड़े चूचे, भारी भरकम गाँड़, बलखाती कमर… एकदम चुदने लायक माल। हरा रंग का टाइट सूट पहना था, गला इतना गहरा कि चूचे बाहर आने को मचल रहे थे। साली 46 की बताई, लेकिन लगती 38 की ही थी। शरीर कड़क और गदराया हुआ।

बातें शुरू हुईं। नाम सुमन बताया। पति मुंबई में नौकरी करता है, बच्चे नहीं। अकेली रहती है गाजियाबाद में। सुनते ही मेरे लौड़े ने कहा – “इस रंडी की प्यासी चूत आज नहीं तो कल फाड़नी है।”

थोड़ी देर बाद साली बोली, “खिड़की वाली सीट पर बैठना है।”

मैंने कहा, “ठीक है रंडी, लेकिन मेरी मर्जी का क्या?”

वे मुस्कुराईं। मैंने उन्हें खिड़की पर बिठाया। अंधेरा होने लगा था, लाइट भी कम थी। मैंने हाथ उनकी कमर पर रखा। फिर गाँड़ पर फेरने लगा। साली कुछ नहीं बोली। हिम्मत बढ़ गई। कुर्ते के अंदर हाथ डाल दिया। अचानक साली बोली, “अरे हरामी ये क्या कर रहा है?” और थोड़ा उठी। उठते ही मेरा पूरा हाथ उसकी गाँड़ पर आ गया और हथेली पैंटी के अंदर चली गई। साली की नरम-नरम गाँड़ मेरी हथेली पर रगड़ने लगी। समझ गया कि ये रंडी गाँड़ घिस रही है। मैं जोर-जोर से दबाने और मसलने लगा। साली और तेज रगड़ने लगी।

मैंने कान में कहा, “अपना नंबर दे रंडी।”

“क्यों?” Hindi Sex Stories

“तेरी चूत बाद में चोदनी है। नंबर दे।”

साली हँसी और नंबर दे दिया। वैशाली में फ्लैट बताया। मैंने पूछा, “तेरे फ्लैट आकर तेरी चूत फाड़ सकता हूँ?” साली बोली, “हाँ हरामी, आ जाना।”

उस दिन बस गाँड़ मसलने और बातों के साथ सफर खत्म हुआ।

नंबर मिल गया तो रोज गंदी बातें शुरू हो गईं। तीसरे दिन से ही मैं पूछने लगा, “रंडी तेरी चूत कितनी प्यासी है? पति चोदता है या नहीं?” साली ने बताया कि पति से बात नहीं बनती, सेक्स में भूखी रहती है। फिर फोन सेक्स, गंदी गंदी बातें, हॉट फोटोज। एक दिन वीडियो कॉल की। साली मैक्सी में थी, नीचे से नंगी। मैंने पूछा, “रंडी लंड चूसना पसंद है?” साली बोली, “बहुत पसंद है हरामी। पति चूसने नहीं देता, वरना पूरा केला निगल जाऊँ।”

मैंने लंड निकालकर दिखाया। साली के मुँह में पानी आ गया। मैंने कहा, “नंगी हो जा कुतिया।” साली ने झट से मैक्सी उतार दी। बड़े गोरे चूचे और मोटी गाँड़ देखकर मेरा लंड पागल हो गया। हम दोनों ने रात भर हाथ से तीन-तीन बार झड़ा। साली कराह-कराह कर गालियाँ दे रही थी।

मैंने पूछा, “सुमन रंडी, कब आऊँ तेरी चूत फाड़ने?”

साली बोली, “जब जी करे आ जा हरामी। जितना जल्दी हो सके।”

अगले दिन 10:30 पर उसके फ्लैट पहुँच गया। गेट बंद किया और कहा, “रंडी, नंगा हो जाऊँ?” साली मुस्कुराई, “जैसा मन हो कर ले लौंडे।”

मैं एकदम नंगा हो गया। लंड पूरा तना हुआ। साली रसोई में थी। मैं पीछे से जाकर चिपक गया और गर्दन चूसने लगा। साली हँसी, “बड़ा बेशर्म है हरामी, नंगा ही आकर चिपक रहा है!” Hindi Sex Stories

मैंने कहा, “ट्रेन में देखे दिन से तेरे नाम की मुठ मार रहा हूँ रंडी। आज तेरे मुँह में और चूत में दोनों जगह मारूँगा।”

मैंने उसके चूचे जोर-जोर से दबाने और मसलने शुरू किए। मैक्सी उतार दी। नीचे से नंगी ही थी। हॉल के दीवान पर ले जाकर चित पटका। दोनों नंगे चिपक गए। बीस मिनट तक सिर्फ मुँह चूसते रहे, थूक पिलाते रहे, जीभ लड़ाते रहे। फिर मैं उसके चूचों पर टूट पड़ा। आधे घंटे से ज्यादा सिर्फ बूब्स चूसे, काटे, मसले। साली एक बार झड़ भी गई।

फिर नीचे गया। उसकी चूत पर मुँह मार दिया। साली की चूत पूरी गीली थी। मैं कुत्ते की तरह चाटने लगा – चूत, गाँड़ का छेद, जांघें, तलवे सब। साली गालियाँ देने लगी, “आह मादरचोद… हरामी कुत्ते… अब चोद दे मुझे… कितना चाटेगा भोसड़ीके!”

जब मेरा मन भर गया तो खड़ा हुआ। साली ने पानी पिया और लंड देखने लगी। मैंने लंड उसके मुँह पर पटका। साली कुतिया बनकर चाटने लगी – नीचे से ऊपर, ऊपर से नीचे, आंड मुँह में लेकर चूसने लगी। फिर पूरा लंड गले तक ले लिया। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और गालियाँ देने लगा:

“चूस रंडी… पूरे गले तक ले… मादरचोद कुतिया… पी मेरा सारा माल… भोसड़ीकी रंडी!”

साली और जोश में आ गई। आखिर में मैंने पूरा गाढ़ा वीर्य उसके मुँह में उड़ेल दिया। साली ने पूरा निगल लिया और लंड चाट-चाट कर साफ कर दिया।

थोड़ी देर आराम करके फिर शुरू किया। लंड दोबारा मुँह में दिया, अच्छी तरह गीला किया और एक जोर के धक्के में उसकी प्यासी चूत में पूरा घुसा दिया। साली चीखी, “आह हरामी… फट गई चूत!” लेकिन फिर मजे से चुदने लगी। मैं धक्के मारते हुए गालियाँ देता रहा, थप्पड़ भी लगाए।

“ले रंडी… ले मेरे लंड… चूत फाड़ दूँगा तेरी… मादरचोद!”

साली कई बार झड़ी, मैं नहीं झड़ा। उसे ऊपर बिठाया और आधे घंटे तक नीचे से चोदता रहा। आखिर में उसके अंदर ही पूरा माल उड़ेल दिया।

उस दिन दोपहर को फिर चोदा। रात को तीन बार चोदा – एक बार चूत में, दो बार मुँह में। चार दिन तक मैंने उस रंडी को दिन-रात बजाया। पूरे फ्लैट में नंगे घूमते रहे। उसकी चूत और गाँड़ दोनों फाड़ीं।

उसके बाद दो साल तक ये रिश्ता चला। जब भी मौका मिलता, उस प्यासी रंडी की चूत का मजा लेता रहा। फिर साली पति के पास मुंबई चली गई।

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