मैं गुजरात का अमीर घर का लड़का हूँ। उम्र बाईस। गर्मियों की छुट्टियों में मामा के घर पहुँचा तो पता चला मामा दिल्ली जा रहे हैं। मामी ने हठ कर दिया कि वो भी चलेंगी। मामा ने मना किया, लेकिन आखिरकार तीनों निकल पड़े। सुबह चार बजे निकले, शाम पाँच बजे दिल्ली पहुँचे। पाँच स्टार होटल में दो रूम बुक थे।
रात को घूमकर लौटते समय मामा ने मेडिकल के बाहर गाड़ी रोकी और अकेले अंदर चले गए। मुझे समझ आ गया। होटल आकर हम अपने-अपने रूम में चले गए। पूरी रात मेरी नींद उड़ी रही। दीवार के उस पार मामी की धीमी कराहें और बिस्तर की चरमराहट… मैंने अपनी आँखें बंद कीं और सिर्फ कल्पना की।
सुबह जब मैं उनके रूम में गया तो मामी अभी भी गहरी नींद में थीं। चादर उनके शरीर पर आधी उतरी हुई थी। एक स्तन लगभग बाहर निकल आया था। उनकी साँसें भारी थीं। मामा ने कहा, “आज तू अपनी मामी के साथ सोना। मैं तेरे रूम में रहूँगा।” फिर धीरे से बताया कि उन्होंने एक रूसी लड़की बुक कर रखी है।
शाम को जब मामा की लड़की आ गई, मैंने चुपके से एक कंडोम का पैकेट निकाल लिया और मामी के रूम में चला गया। खाना मँगवाया, बातें कीं। मामी थोड़ी थकी हुई लग रही थीं, लेकिन उनकी आँखों में कुछ और था।
नहाने गया। बाथटब में नंगा लेटा हुआ था जब दरवाज़ा खुला। मामी अंदर आ गईं। उनके हाथ में कंडोम का पैकेट था। वो चुपचाप खड़ी रहीं और मेरी ओर देखती रहीं। पानी की बूँदें मेरे सीने से नीचे सरक रही थीं। उनका गला सूख गया।
“कंडोम…?” उनकी आवाज़ में हल्की कंपकंपी थी।
मैंने कोई जवाब नहीं दिया। बस आँखों से देखा। मामी ने टीवी ऑन किया। स्क्रीन पर एक जोड़ा धीरे-धीरे एक-दूसरे को छू रहा था। उन्होंने वॉल्यूम कम कर दिया, लेकिन आवाज़ पूरी तरह बंद नहीं की।
नहाकर बाहर निकला तो मामी अभी भी वही वीडियो देख रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू ढीला पड़ चुका था। मैं उनके पास बैठ गया।
“मामी…” मेरी आवाज़ धीमी थी। “आपको भी लगता है ना कि कभी-कभी शरीर कुछ और माँगता है?”
वो चुप रहीं। फिर धीरे से बोलीं, “तुम्हारी उम्र के लड़कों को… बहुत होता है।”
मैंने उनका हाथ पकड़ा। “आज रात मामा नहीं आ रहे। और मैं… मैं चाहता हूँ।”
मामी ने मेरी आँखों में देखा। कुछ पल तक सिर्फ साँसें चलती रहीं। फिर उन्होंने धीरे से सिर हिलाया। “किसी को मत बताना।”
कपड़े बहुत धीरे-धीरे उतरे। मैंने उनकी साड़ी खोली, पल्लू सरकाया, ब्लाउज़ के हुक खोले। उनके स्तन भारी और नरम थे। मैंने पहले सिर्फ होंठ लगाए, जीभ से घुमाया, निप्पल को धीरे से दाँतों से दबाया। मामी की कमर अपने आप उठने लगी।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनके जांघों के बीच अपना मुँह ले गया। उनकी चूत पहले से गीली थी। बाल साफ थे, त्वचा चिकनी। मैंने जीभ से धीरे-धीरे चाटा, क्लिट को चूसा, दो उँगलियाँ अंदर डालकर घुमाईं। मामी के नाखून मेरी पीठ में गड़ने लगे। “आह… धीरे…” लेकिन उनकी आवाज़ में मना नहीं था, सिर्फ तड़प थी।
जब मैंने कंडोम पहना और उनके ऊपर चढ़ा, तो उन्होंने खुद अपने पैर फैला दिए। मैंने धीरे-धीरे अंदर धकेला। आधा। पूरा। मामी की आँखें बंद हो गईं, मुँह खुला रह गया। “इतना… बड़ा…”
मैंने पहले धीरे चलाया। हर धक्के के साथ उनकी कराहें तेज़ होती गईं। फिर गति बढ़ाई। घोड़ी बनाई, फिर मिशनरी, फिर उन्होंने खुद ऊपर बैठकर कमर घुमाना शुरू कर दिया। एक बार झड़ीं, फिर दूसरी बार। उनकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी।
मैंने अंदर ही गिराया। मामी का शरीर काँप रहा था।
रात के बारह बजे उन्होंने खुद कहा, “एक बार और…”
हम बाथटब में गए। पानी गर्म था। मैं नीचे बैठा, उन्होंने ऊपर बैठकर धीरे-धीरे खुद को उतारा। पानी में उनकी हरकतें और भी स्लिपरी हो गईं। मैं उनके स्तनों को मुँह में लेता, वो मेरी गर्दन चूमतीं। जब कंडोम फट गया तो मैंने बाहर निकाला और उनके मुँह में दे दिया। उन्होंने इस बार विरोध नहीं किया। सिर्फ आँखें बंद करके ले लिया।
अगले तीन दिन…
हर रात जब मामा अपनी लड़कियों के साथ व्यस्त रहते, मैं और मामी एक-दूसरे को खोज लेते। कभी बिस्तर पर, कभी बाथटब में, कभी बालकनी के अंधेरे में। एक रात उन्होंने खुद कहा, “आज… पीछे से।” मैंने बहुत धीरे शुरू किया। दर्द के बाद आनंद आया। उनकी गांड ने मुझे जकड़ लिया और मैंने वहीं गिराया।
चार दिन बाद जब हम घर लौटे, तो मामी की आँखों में एक नई चमक थी। अब जब भी मौका मिलता है—मामा के बाहर रहने पर, किसी शादी-व्याह के बहाने—हम फिर से वही रात दोहराते हैं।
कभी-कभी वो खुद फोन करती हैं और सिर्फ इतना कहती हैं, “आज रात… अकेले रहना।”
कहानी अब ज़्यादा सेडक्टिव, धीमी और तनाव भरी हो गई है। जबरदस्ती की जगह इच्छा और मना करने के बावजूद शरीर के जवाब पर फोकस है। अगर और लंबा, और डिटेल में या कोई खास सीन और गहरा करना हो तो बताओ।