चचेरे भाई से सीलपैक चूत का उद्घाटन करवाया

यह कहानी एक परिपक्व महिला सरोज कासवान की है, जो अपनी युवावस्था की पहली यौन अनुभूति को याद करती हुई बताती है।

मेरा नाम सरोज कासवान है। आज मैं अपनी असल जिंदगी की वह कहानी सुना रही हूँ जो नौ साल पहले घटी थी। उस समय मेरी उम्र इक्कीस साल थी और मेरी छोटी बहन आरती की उम्र उन्नीस साल। हम बाड़मेर के एक दूर-दराज के ढाणी में रहते थे। घर में सिर्फ हम दो बहनें और माँ थीं। पिता और बड़ा भाई दोनों बाहर काम करते थे।

उस उम्र में मेरी लगभग सभी सहेलियाँ किसी न किसी से शारीरिक संबंध बना चुकी थीं। मैं और आरती दोनों कुंवारी थीं। हम घर से बहुत दूर रहते थे, इसलिए किसी लड़के से मिलना आसान नहीं था। रात को हम दोनों एक-दूसरे से छेड़छाड़ करके अपनी उत्तेजना शांत करती थीं, लेकिन असली पुरुष का स्पर्श हमें नहीं मिला था।

हमारा चाचा का घर करीब एक किलोमीटर दूर था। चाचा के बेटे गोविंद से हम बचपन से बहुत घनिष्ठ थे। गोविंद उस समय उन्नीस साल का था। हम तीनों बचपन में साथ खेलते थे, साथ सोते थे और कभी-कभी मासूम खेलों में एक-दूसरे को छूते भी थे। लेकिन अब मेरा मन बदल चुका था। सहेलियों की बातें सुन-सुनकर मुझे भी गोविंद से संबंध बनाने की तीव्र इच्छा हो रही थी। आरती भी इसी सोच में थी।

एक बार हमारी माँ तीन-चार दिन के लिए ननिहाल चली गईं क्योंकि नानी का देहांत हो गया था। जाने से पहले उन्होंने गोविंद से कहा कि रात को हमारे घर ही सोना, क्योंकि हम दोनों बहनें अकेली होंगी। गोविंद ने मान लिया।

उस दिन मैंने टाइट जींस और टॉप पहना जिसमें मेरे स्तन साफ दिख रहे थे। आरती ने गुलाबी सलवार-कुर्ता पहना। शाम को छह बजे गोविंद आया। मैंने उसे पानी पिलाया, आरती चाय बनाने चली गई। हम बातें करते रहे। मैं उसकी गोद में सिर रखकर टीवी देखने लगी। मुझे महसूस हुआ कि वह बार-बार मेरे स्तनों की ओर देख रहा है और कभी-कभी हल्के से छू भी रहा है।

रात को हम तीनों एक ही कमरे में सोने चले। बीच वाले पलंग पर गोविंद, एक तरफ मैं और दूसरी तरफ आरती। गोविंद मेरी गोद में सिर रखकर टीवी देखता-देखता सो गया या सोने का नाटक करने लगा। मैंने जानबूझकर अपना पैर उसके पैर पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ने लगी। फिर अपना हाथ उसके लिंग पर रख दिया। वह पूरी तरह खड़ा हो चुका था। मैं धीरे-धीरे सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद उसने भी मेरी छाती पर हाथ रखा और मसलने लगा। फिर उसका हाथ मेरी नाभि से होते हुए नीचे जा पहुँचा।

मैंने खुद अपनी जींस के बटन खोल दिए और जिप नीचे खिसका दी। उसने अंडरवियर के अंदर हाथ डालकर मेरी गीली योनि को सहलाया। मैंने कहा, “पूरी उतार दो।” मैंने खुद अपनी जींस और पैंटी घुटनों तक उतार ली। उसने भी अपनी पैंट उतार दी। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने और सहलाने लगे। उसने मेरा टॉप और ब्रा उतार दिया और मेरे गोल-मटोल स्तनों को मुँह में लेकर चूसने लगा। मैंने उसकी बनियान और चड्डी भी उतार दी। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे।

उसने लिंग पर थूक लगाया, मेरे नितंबों के नीचे तकिया रखा और धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा। पहली बार होने के कारण मुझे तेज दर्द हुआ। उसने रुककर धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। तीन-चार धक्कों में पूरा लिंग अंदर समा गया। मैं चीख पड़ी। आरती जाग गई लेकिन उसने सोने का नाटक जारी रखा। गोविंद डर गया, लेकिन मैंने कहा कि वह नहीं जागेगी। फिर उसने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। करीब दस मिनट बाद वह मेरे अंदर झड़ गया।

उस रात उसने मेरे साथ चार बार संबंध बनाए। सुबह पाँच बजे आरती दूध निकालने बाहर गई। मैंने गोविंद के लिंग को फिर से खड़ा किया और उस पर बैठकर उछलने लगी। आरती लौटकर आई और हमें देखकर शरमा गई। मैंने उसे बुला लिया। गोविंद ने आरती की भी कुंवारी योनि का उद्घाटन किया और उसके साथ भी दो बार संबंध बनाए।

उस दिन हम तीनों लगभग पूरे समय नंगे रहे। नहाने के दौरान भी एक-एक राउंड किया। दोपहर को फिर दो बार। शाम को आम का रस पीने के बाद फिर से। हम दोनों बहनों में होड़ लग गई थी कि कौन ज्यादा देर तक उसके ऊपर रहेगी। रात को भी जब-जब मन करता, वह हमें ले लेता।

दूसरे दिन सुबह उसने आरती को घोड़ी बनाकर जोर से चोदा। फिर उसने कहा कि वह हमारे नितंबों में भी प्रवेश करना चाहता है। हमने मना नहीं किया। मेरी नितंब बहुत टाइट थी, इसलिए दोनों को दर्द हुआ, लेकिन हमने जारी रखा।

चार दिन तक गोविंद ने हम दोनों बहनों की योनि और नितंब दोनों जगह खूब चोदा। उसके बाद तीन साल तक यह संबंध जारी रहा। दोनों छेद धीरे-धीरे ढीले हो गए। शादी के बाद आरती ने यह सब बंद कर दिया, लेकिन मैं जब भी मायके जाती हूँ तो गोविंद अभी भी मुझसे संबंध बनाता है। वह कहता है कि मेरी आकृति और बड़ी नितंब उसे बहुत पसंद हैं। मैं मना नहीं करती।

हम तीनों के अलावा किसी को इस संबंध की जानकारी नहीं है। अब मैं दो बच्चों की माँ हूँ, फिर भी हमारा वह पुराना लगाव आज भी वैसा ही है।

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