सेठ की पत्नी को जमकर पेला – hindi sex stories

ये रहा तुम्हारी कहानी का रीफ्रेज़्ड वर्जन — वही कहानी, थोड़ा बेहतर फ्लो और भाषा के साथ:


मेरी पहली XXX की कहानी on hindi sex stories

दोस्तो, मैं कोई लेखक नहीं हूँ। बस यहाँ कई कहानियाँ पढ़ने के बाद सोचा कि अपनी ज़िंदगी की ये घटना भी आप लोगों से शेयर कर दूँ। उम्मीद है आपको पसंद आएगी।

जब से सेक्स समझने लायक हुआ हूँ, तब से कुँवारी लड़कियों से ज़्यादा भाभियों और आंटियों पर ही नज़र जाती है। उनका गदराया हुआ बदन, भरे-भरे बूब्स और मटकती हुई गाँड़ मुझे हमेशा खींचती रही।

मेरी पहली चुदाई की ये कहानी उस समय की है जब मैं 12वीं पास करके एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर काम सीखने गया था। दुकान के मालिक को मैं अंकल कहता था। वो काफी अच्छे इंसान थे। दोपहर को हम दुकान बंद करके खाना खाते और थोड़ा आराम करते, शाम को फिर खोलते। मेरे सोने के लिए अलग कमरा था। अंकल-आंटी दोनों अकेले रहते थे। उनके दोनों बेटे होस्टल में पढ़ते थे।

आंटी बहुत खूबसूरत थी। थोड़ी मोटी ज़रूर, लेकिन कयामत लगती थी। गोरा गदराया बदन, सीने में लटकते भारी बूब्स और कमर के नीचे भारी गाँड़… देखकर मेरा लंड हर बार खड़ा हो जाता। खाना खाने के बाद अंकल अपने कमरे में चले जाते और आंटी किचन का काम समेटती। मैं उन्हें खाने वाली निगाहों से देखता रहता। महीनों तक मैं सिर्फ़ देखता रहा, सोचता रहा और अकेले में मुठ मारता रहा।

एक दिन अंकल-आंटी दोनों सो रहे थे। मैं खिड़की से देख रहा था। आंटी का पल्लू सरक गया था। गहरे गले वाले ब्लाउज में उनके बूब्स आधे से ज़्यादा बाहर थे और साड़ी ऊपर सरकी होने से आधी जांघें दिख रही थीं। मैं वहीं खड़े-खड़े मुठ मारकर शांत हुआ।

अगले दिन खाना खाने के बाद मैं ऊपर के कमरे में गया। छत पर आंटी की पैंटी सूख रही थी। मैंने उसे चुरा लिया, कमरे में आकर नंगा हो गया और आंटी की कल्पना करके लंड हिलाने लगा। तभी दरवाज़ा खुला। आंटी कपड़े लेने आई थीं। पैंटी न मिलने पर इधर-उधर देखने लगीं तो खिड़की से मुझे नंगा और हाथ में उनकी पैंटी पकड़े देख लिया।

वो तुरंत अंदर आईं और गुस्से में बोलीं, “ये क्या कर रहे हो तुम?!” hindi sex stories

मैं डर गया। एक हाथ से लंड पकड़े हुए सॉरी बोलते हुए उनकी पैंटी वापस दे दी। उन्होंने झटके से पैंटी छीन ली और बोलीं, “कितने हरामी हो!”

तब मैंने साफ़-साफ़ कह दिया, “जब-जब आपको देखता हूँ मेरा लंड खड़ा हो जाता है। बस आपको चोदने का ही ख्याल आता है।”

आंटी ने मेरा हाथ हटाया। जैसे ही उनकी नज़र मेरे 7 इंच लंबे और मोटे लंड पर पड़ी, गुस्से में हवस की चमक आ गई। मुँह खुला का खुला रह गया। उन्होंने लंड पकड़ लिया और जोर-जोर से हिलाने लगीं। थोड़ी देर में मेरा पानी उनके बूब्स की दरार में निकाल दिया।

मैंने कहा, “आज तो हिलाकर शांत कर दिया, लेकिन अपनी चूत में कब लोगी? ये कब से तड़प रहा है।”

आंटी ने कहा, “अब तो मैं भी बेचैन हो रही हूँ। लेकिन अंकल घर पर हैं। जिस दिन वो सामान खरीदने बाहर जाएँगे, उस दिन मज़े करेंगे। तब तक इंतज़ार करो मेरे राजा।”

अगले दिन अंकल ने कहा कि आज सामान खरीदने बाहर जाना है, जल्दी बंद करेंगे। मैं खुशी से पागल हो गया। घर पहुँचे तो आंटी ने पूछा कि आज इतनी जल्दी कैसे। अंकल ने बताया कि बाहर जाना है। आंटी ने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दीं।

खाना खाने के बाद अंकल चले गए। मैंने मेन डोर बंद किया और किचन में जाकर आंटी को पीछे से बाहों में भर लिया। उनकी गर्दन चूमने लगा। उन्होंने कहा, “पहले काम खत्म करने दो।” लेकिन मैं नहीं माना। उनके ब्लाउज के हुक खोले, साड़ी-पेटीकोट उतार दिए। अब वो सिर्फ़ पैंटी में थीं।

काम खत्म होते ही उन्होंने मुझे गले लगा लिया। मैं उन्हें बेडरूम ले गया। पहले माथे, फिर गालों और होठों को चूमा। फिर गर्दन से नीचे उतरते हुए उनके बूब्स चूसने लगा। आंटी कराहने लगीं। मैं और नीचे गया, उनकी जांघें फैलाकर चूत चाटने लगा। ये मेरा पहला अनुभव था। जब उनकी चूत से गरम पानी निकला तो बहुत स्वादिष्ट लगा। मैंने पूरी चाट ली। hindi sex stories

फिर आंटी ने मुझे खड़ा किया, मेरे कपड़े उतारे और लंड मुँह में ले लिया। लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। लंड मोटा होने की वजह से पूरा नहीं जा पा रहा था, लेकिन मैं उनके सिर को पकड़कर अंदर-बाहर करने लगा। करीब पंद्रह मिनट बाद उन्होंने कहा, “अब और इंतज़ार नहीं होता। चोदो मुझे!”

मैंने उन्हें लिटाया, कमर के नीचे तकिया रखा और टाँगें कंधों पर रखकर लंड उनकी चूत पर सेट किया। पहला जोरदार धक्का दिया तो सिर्फ़ सुपाड़ा ही अंदर गया। आंटी चीख पड़ीं। मैंने उनका मुँह अपने मुँह से बंद कर लिया और फिर दो-तीन जोरदार धक्के लगाकर पूरा सात इंच अंदर धकेल दिया। पहले तो दर्द हो रहा था, लेकिन धीरे-धीरे वो एंजॉय करने लगीं और कमर हिलाने लगीं।

फिर हमने पोजीशन बदली। आंटी ऊपर बैठ गईं और खुद गाँड़ हिला-हिलाकर चुदाने लगीं। मैं उनके हिलते बूब्स मसलता रहा। वो दो बार झड़ चुकी थीं। फिर मैंने उन्हें कुतिया बना लिया और पीछे से चोदने लगा। जब मेरा निकलने वाला था तो मैंने पूछा, “माल कहाँ डालूँ?” उन्होंने कहा, “चूत में ही डाल दो।”

मैंने स्पीड बढ़ाई और पूरा वीर्य उनकी चूत में उड़ेल दिया। दोनों पसीने से लथपथ बेड पर गिर गए। आधे घंटे बाद आंटी बाथरूम गईं तो मैं भी साथ हो लिया। उन्होंने साबुन लगाकर मेरा लंड धोया तो वो फिर खड़ा हो गया। बाथरूम में ही खड़े-खड़े दोबारा चोदा।

उसके बाद जब भी अंकल सामान खरीदने बाहर जाते, हम दोनों रासलीला मनाते।

ये थी मेरी पहली XXX की कहानी। उम्मीद है आपको अच्छी लगी होगी।

By Admin

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