मेरी मजहबी अम्मी एक गैरमर्द के लौड़े से चुदीं

दोस्तो, मेरा नाम मिर्जा है… उत्तर प्रदेश का रहने वाला।
ये कहानी मैं पहली बार लिख रहा हूँ, इसलिए अगर कहीं कोई कमी रह जाए तो माफ कर देना। लेकिन जो देखा, जो महसूस किया… वो बताए बिना रह नहीं सकता।

मेरी अम्मी नाजिया। उम्र पैंतालीस। पूरे शहर में मजहबी औरत के नाम से जानी जाती हैं। हिजाब के बिना घर से बाहर कदम तक नहीं रखतीं। गैर मर्दों से नजरें मिलाकर बात करने में भी संकोच करती हैं। घर में बस मैं और वो। अब्बू दुबई में रहते हैं।

ईद की छुट्टियाँ खत्म हुई थीं। सुबह कॉलेज जाने के लिए तैयार हुआ, बाइक निकाली। रास्ते में जहांगीर मिल गया। उसे अपनी बंदी को घुमाने के लिए बाइक चाहिए थी। मेरा भी कॉलेज जाने का मन नहीं था, सो बाइक दे दी और पैदल ही घर की तरफ लौट पड़ा।

घर पहुँचा तो सामने एक काली बुलेट खड़ी थी। बिल्कुल अपरिचित। मुहल्ले के बच्चों से पूछा तो वे हँस पड़े—
“भैया, आपके रिश्तेदार की है। न जाने कितनी बार आ चुके हैं!”

रिश्तेदार? अम्मी ने कभी बताया ही नहीं। दिल में शक उठने लगा। मैं सीधा दरवाजे की तरफ नहीं गया। घर के पीछे खाली प्लॉट से घूमकर खिड़की के पास पहुँचा और झाँका…

जो नजारा आँखों के सामने था, उससे मेरे होश उड़ गए।

मेरी मजहबी अम्मी… खुले बाल, लाल लिपस्टिक, हाई हील्स पहने, जमीन पर घुटनों के बल बैठी थीं। और उनके मुँह में… एक तगड़े, जिम वाले, नसों वाले नौजवान का मोटा, काला, अनकट लंड समाया हुआ था। वो लंड इतना मोटा और लंबा था कि मेरे लंड से दोगुना लग रहा था। अम्मी उसकी चमड़ी को होंठों से खींच-खींचकर टोपे पर स्मूच कर रही थीं, फिर जीभ अंदर डालकर चाट रही थीं जैसे कोई भूखी औरत हो।

वो मर्द कराह रहा था—
“आह्ह… नाजिया… मम्म… क्या मस्त लंड चूसती है तू… बहन की लौड़ी रांड… आह उह!”

मेरे कानों में जैसे विस्फोट हो गया। गुस्सा आया… नफरत आई… लेकिन उसी पल पैंट के अंदर मेरा लंड उफान मारने लगा। नफरत की जगह एक अजीब सी गर्मी फैल गई।

तभी उस पहलवान ने अम्मी को कंधे पर उठाया और नंगी हालत में ऊपर ले जाने लगा। मैंने चुपके से चाबी से दरवाजा खोला, अंदर घुसा और छत की तरफ रेंगता हुआ उनके कमरे तक पहुँच गया। दरवाजा खुला था। अम्मी को यकीन था कि घर में कोई नहीं है।

दरवाजे की आड़ में छिपकर देखा…

अम्मी ब्रा-पैंटी में सिगरेट पी रही थीं। गोरे, तने हुए, रसभरे चूचे ब्रा से बाहर आने को बेताब थे। सुधीर (हाँ, वही शहर के काउंसलर का बेटा) उनकी ब्रा उतारकर चूचियाँ दबाने, चूसने, दाँतों से काटने लगा। अम्मी सिगरेट के कश लेती हुई कराह रही थीं—
“आह्ह… उफ्फ… और जोर से…”

फिर दोनों नंगे हो गए। अम्मी ने सुधीर के मोटे अनकट लंड को दोनों हाथों में लिया और फिर से मुँह में भर लिया। ग्लवक्क… स्लारप्प… ग्लैक्क… आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। सुधीर ने उनके बाल पकड़कर पूरा लंड गले तक पेल दिया। अम्मी की आँखों से आँसू बहने लगे, लेकिन उन्होंने विरोध नहीं किया।

फिर सुधीर ने अम्मी को बिस्तर पर पटक दिया, टाँगें फैलाईं और अपना आठ इंच का काला लंड एक ही धक्के में उनकी गीली, साफ चूत में धँस दिया। अम्मी की चीख निकल गई। सुधीर ने मुँह दबा लिया और जोर-जोर से पेलने लगा।

थोड़ी देर बाद अम्मी की चीखें सिसकारियों में बदल गईं—
“आह्ह… चोदो… और जोर से… अपनी रांड गर्लफ्रेंड को… आज फाड़ दो मेरी चूत!”

“बोल साली… तू मेरी रांड है!”
“हाँ… रंडी हूँ मैं सुधीर की… चोद दे मुझे बहन के लौड़े!”

अम्मी दो बार झड़ चुकी थीं। सुधीर ने धक्के और तेज कर दिए, चूचियाँ नोचते हुए गालियाँ देते हुए उनकी चूत में ही अपना पूरा वीर्य उड़ेल दिया।

दोनों निढाल होकर लेट गए। सुधीर ने सिगरेट सुलगाई और पूछा—
“कैसी लगी चुदाई, नाजिया?”

अम्मी मुस्कुराईं—
“सच में… तू मेरी चूत फाड़ देता है। तेरे लौड़े से बहुत संतुष्ट हूँ।”

फिर सुधीर बोला—
“नाजिया… मुझे तो तुम्हारी जैसी मजहबी औरतों की गांड मारने में बड़ा मजा आता है।”

मैंने सोचा अब अम्मी मना कर देंगी… लेकिन उनका जवाब सुनकर फिर से सदमा लगा—
“सुधीर… अनकट लौड़े का असली मजा तो गांड में ही है। वो मजहबी औरत ही क्या जो अनकट लंड अपनी गांड में न ले!”

सुधीर हँसा—
“तो अगली बार बुर्के में ही गांड मरवाना। वही बुर्का देखकर तो मैं दीवाना हुआ था।”

अम्मी शर्माते हुए बोलीं—
“ठीक है… अगली बार तुम्हारी रंडी बुर्के में गांड मरवाएगी। अब जाओ, मिर्जा आने वाला होगा।”

मैं भागकर छत पर छिप गया। सुधीर ने अम्मी को चूमा, उनकी गांड मसली और चला गया।

दोस्तो…
उस दिन मैंने पहली बार देखा कि मेरी हिजाबी, मजहबी अम्मी कितनी गहरी रांड बन सकती हैं।
और अगली कहानी में… जब वो बुर्के में अपनी गांड मरवाएँगी… वो मैं तुम्हें जरूर सुनाऊँगा।

बताओ, ये पोर्न मॉम स्टोरी कैसी लगी?

By Admin

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