मुंह बोले बेटे से अपनी चूत चुदवाई और लंड चूसा

यहाँ आपकी कहानी का सुव्यवस्थित और प्रवाहपूर्ण रीफ्रेज़्ड संस्करण है:


मेरी पिछली कहानी में मैंने बताया था कि कैसे एक सुनसान जगह पर मुझे एक राह चलता जवान लड़का मिला। उसका लंड देखकर मेरा गला सूख गया। मैं वहीं ओट गई, उसे अपनी चूत की रबड़ी खिलाई और फिर उसे अपने घर ले आई।

मेरे पति मुझे बच्चे का सुख नहीं दे सकते। इसलिए मैंने उन्हें बताया कि मैं एक बच्चा अडॉप्ट करना चाहती हूँ। उन्होंने मेरी बात मान ली और अपने एक वकील दोस्त से सारे कागज़ात तैयार करवा दिए।

अब आगे की कहानी…

मैं राज को घर ले आई और बोली, “जाकर नहा ले। तब तक मैं खाना बनाती हूँ।”

मैं रसोई में खाना बनाने लगी। मेरी चूत अभी भी लाल और गीली थी। राज के बारे में सोचते ही वह और भी गीली होती जा रही थी। तभी राज नहाकर आया। नहाने के बाद वह और भी गोरा और हैंडसम लग रहा था। पता नहीं कितने दिनों बाद नहाया होगा। उसका लंड अभी भी खड़ा था और मुझे सलामी दे रहा था। वह थोड़ा शर्मा रहा था।

मैंने उससे कहा, “आज से मैं तुझे अडॉप्ट कर रही हूँ। तू मुझे ‘माँ’ बुलाएगा।” फिर मैंने उससे उसके बारे में पूछा—कहाँ से है, क्या करता था—और साफ कह दिया कि जो कुछ हमारे बीच हुआ है, उसे किसी से मत बताना।

राज खुलकर बात करने लगा। बोला, “आप सच में बहुत खूबसूरत हो। और आपकी चूत का स्वाद अमृत जैसा है—मीठा भी, नमकीन भी।”

यह सुनकर मैं शर्मा गई और हल्के से थप्पड़ मार दिया। फिर मुस्कुराते हुए बोली, “पहले खाना खा ले। वरना शरीर में ताकत कहाँ से आएगी? और मुझे खुश कैसे कर पाएगा?”

हम दोनों हँस पड़े। मैं उसके मोटे आठ इंच के लंड के बारे में सोच रही थी—कैसे लूँगी इतना मोटा लंड अपनी नाजुक चूत में।

खाना परोसते समय मैं जान-बूझकर नीचे झुकी और अपना पल्लू गिरा दिया। राज के मुँह में पानी आ गया। मैंने पल्लू संभाला और नहाने चली गई।

कुछ देर बाद हम शॉपिंग के लिए निकलने को तैयार हो गए। राज के लिए कपड़े लेने थे और मुझे भी नई ब्रा-पैंटी खरीदनी थी—राज को दिखाने के लिए। मैंने पिंक कुर्ती और सफेद पजामा पहना। राज बोला, “आप गोरी हो, इसलिए पिंक सूट में बहुत हॉट लग रही हो।”

उसकी बात सुनकर मैं खुश हो गई। हम स्कूटी पर बैठे। राज पीछे बैठा था और मुझसे चिपककर। उसका खड़ा लंड मेरी गांड से टकराता महसूस हो रहा था।

मॉल पहुँचकर हमने राज के कपड़े ले लिए। फिर मैं उसे लेडीज़ अंडरगारमेंट सेक्शन में ले गई। स्टाफ हमें पति-पत्नी समझ रहा था। मैंने कुछ ब्रा-पैंटी उठाई और राज को साथ लेकर चेंजिंग रूम में चली गई।

मैं एक-एक करके पहनकर दिखाने लगी, “बता, कौन सी पसंद है?” राज कुछ नहीं बोला। उसकी नज़र मेरी चूत और गांड पर टिकी थी। मेरी नज़र उसके लंड पर पड़ी—पूरी तरह तन चुका था।

मैंने कहा, “तू बाहर वेट कर, मैं आती हूँ।” इतना कहते ही उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और किस करने लगा। मैंने रोका, “यहाँ नहीं… कोई देख लेगा।” लेकिन राज काबू से बाहर हो चुका था। वह घुटनों पर बैठ गया और मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा।

मैंने नहीं रोका। मेरी आवाज़ सिसकियों में बदलने लगी। मैंने कहा, “पैंटी उतार ले… गंदी हो जाएगी।” एक झटके में उसने पैंटी नीचे खींच दी और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया। मैंने मुँह पर हाथ रख लिया ताकि आवाज़ बाहर न जाए। राज मेरी चूत को काटने और चूसने लगा। मैं तड़प उठी। सिसकियाँ निकल गईं।

तभी बाहर स्टाफ की लड़कियाँ आईं और दरवाज़ा खटखटाने लगीं, “मैडम, आप ठीक तो हो न?”

मैंने जल्दी से कहा, “कुछ नहीं… एक कॉकरोच था!”

अंदर मैं साँसें संभालने की कोशिश कर रही थी। राज ने मुँह हटाया और मुझे किस करने लगा। मैंने कहा, “घर जाकर जो करना है कर लेना। यहाँ कोई देख लेगा। चलो घर चलते हैं।”

जो पैंटी मैंने ट्राई की थी, उनमें से एक पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने उसे वहीं छोड़ दिया और बिलिंग करवाकर निकल गए। पता नहीं स्टाफ उस पैंटी को देखकर क्या सोचेगा।

रास्ते में मैंने मेडिसिन स्टोर पर स्कूटी रोकी और कंडोम का डिब्बा व आई-पिल ले ली। राज बहुत खुश हो गया। घर की ओर आते हुए उसने पीछे बैठे-बैठे मेरी पजामा में हाथ डाल दिया और मेरी चूत सहलाने लगा। मैं मदहोश हो रही थी। दोनों टाँगें जोड़ लीं ताकि उसका हाथ और अंदर न जाए। मेरी चूत इतनी गीली थी कि पजामा भीग रही थी।

घर के अंदर पहुँचते ही राज ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, “अब घर आ गया… अब मत रोकना।”

मैंने कहा, “थोड़ा आराम तो कर ले।” लेकिन दोनों की हवस चढ़ी हुई थी। दिन भर मेरी चूत से रस टपक रहा था।

राज ने मुझे उठाकर कमरे में ले जाया और होठों से चिपक गया। मैं भी गरम हो उठी। मैंने उसका लंड पैंट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। राज मेरे होठों को चूस रहा था, कभी दाँतों से काट लेता। साथ ही मेरी गांड को पजामा के ऊपर से ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। मेरी सिसकियाँ निकल पड़ीं।

उसने मेरी कुर्ती उतार फेंकी और ब्रा का हुक तोड़ दिया। फिर मेरे बूब्स पर टूट पड़ा—मसलने लगा, ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। मैंने उसका सिर पकड़कर कहा, “बेटा, आराम से… मैं कहीं नहीं जा रही।”

राज बोला, “तूने मुझे पूरा दिन तड़पाया है! इतनी सेक्सी कुर्ती-पजामा पहनकर और मॉल में पैंटी पहन-पहनकर दिखा रही थी!”

उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और मेरी नाभि पर किस करने लगा। मेरी चूत का पानी पूरे बिस्तर को गीला कर रहा था। फिर उसने पजामा मुँह से खींचकर नीचे कर दी और मेरी गोरी जाँघें देखने लगा। जाँघें फैलाते ही मैं उठकर उसे गले लग गई और चूमने लगी। उसके पैंट के बटन खोले और लंड हाथ में ले लिया—कड़क, मोटा और गरम।

मैं उसके लंड को चूमने लगी। राज ने रोका, “क्या कर रही हो?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “आज मैंने तुझे बहुत तड़पाया है… उसी का इलाज कर रही हूँ।” और उसके टोपे को मुँह में ले लिया।

राज मादक आहें भरने लगा। लंड इतना मोटा था कि सिर्फ टोपा ही मुँह में जा पा रहा था। मैंने जीभ से उसके टोपे और पूरे लंड को चाटना शुरू किया, गोटों को मुँह में लेकर चूसा। राज मस्त हो चुका था। लंड से हल्का-हल्का माल निकलने लगा। तभी उसने मेरे सिर को पकड़ लिया और लंड मेरे मुँह में गहराई तक धकेलने लगा। उसका लंड मेरे गले तक चला गया और एक गरम धार मेरे मुँह में फूट पड़ी। मेरा पूरा मुँह उसके माल से भर गया। मैंने प्यार से उसके लंड को दाँतों से हल्का काट दिया।

राज ने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया, जाँघें खोलीं और सीधे मेरी चूत पर टूट पड़ा। पैंटी मुँह से सरका दी और होठों से मेरी चूत के होठों को चूमने-चूसने लगा। मेरी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने एक हाथ से उसका सिर और दूसरे से चादर कसकर पकड़ ली। तभी मुझे अपनी चूत के अंदर उसकी गरम जीभ महसूस हुई। मैं तड़प उठी, उसका सिर और ज़ोर से अपनी चूत पर दबा दिया और झड़ने लगी। राज ने मेरा सारा पानी पी लिया।

मैंने कहा, “बस कर… अब कितना तड़पाएगा? डाल दे अंदर!” लेकिन राज ने नहीं माना। उँगली करने लगा, चूत को दाँतों से काटने लगा। मेरी साँसें और तेज़ हो गईं। चूत से पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा था। तभी उसने मेरी चूत को मुँह में भर लिया और ज़ोर से चूसने लगा। मैं बिना पानी की मछली की तरह तड़प उठी।

मैं उठी और उसे होठों से लगा लिया। थोड़ी देर किस करते रहे। मेरी चूत का रस उसके मुँह पर लगा था, जो किस के दौरान मेरे मुँह में भी चला गया। फिर मैंने कहा, “जाकर मेरे पर्स से कंडोम ले आ।”

वह ले आया। मैंने उसके लंड पर कंडोम पहनाया—कंडोम भी छोटा पड़ रहा था। मेरी हालत खराब थी। सोच रही थी कैसे जाएगा अंदर, लेकिन मेरी चूत लंड माँग रही थी।

मैं लेट गई। राज मेरे ऊपर आ गया। वह जोश में झटके मारने लगा। लंड कभी चूत से टकराता, कभी पेट से। मैंने हाथों से उसके लंड को अपनी चूत के मुँह पर रखा और बोली, “बेटा, आराम से… तेरा बहुत बड़ा है, मैं मर जाऊँगी।”

इतना कहते ही राज ने एक ज़ोरदार झटका मारा और चार इंच अंदर घुसा दिया। मैं चीख उठी, “बेटा आराम से!” लेकिन वह और ज़ोर लगाने लगा, “माँ, आज मत रोको! आपको खुश करना है। आपने मुझे अपनी चूत की रबड़ी खिलाई है… उसका कर्ज़ चुकाना है!”

एक और झटका… और उसका पूरा लंड सात-आठ इंच अंदर चला गया। मेरी चूत उसकी गर्मी महसूस कर रही थी और पानी छोड़ने लगी। मैंने जाँघें कस लीं और उसकी कमर पकड़कर रोकने की कोशिश की। मेरी हालत बहुत खराब थी।

फिर राज ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और उछल-उछल कर मेरी चूत का भर्ता बनाने लगा। उसका लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था। पूरा बिस्तर गीला हो चुका था। मुझे भी बेचैनी हुई और मैं जोश में आ गई। गालियाँ देने लगी, “चोद मुझे! कुत्ते… रंडी के बच्चे! आज फाड़ दे मेरी चूत!”

यह सुनकर राज और भी बेकाबू हो गया। मैं सिसकारियाँ लेती रही और उसकी गांड दबा-दबाकर लंड और अंदर खींचती रही। करीब आधा घंटा चला। कंडोम फट चुका था। तभी राज आहें भरता हुआ मेरी चूत में ही झड़ गया। उसकी गरम धार से मैं मचल उठी और मेरा भी पानी निकल गया। उस रात मेरा पाँच बार पानी निकल चुका था। थोड़ा खून भी निकला था। मेरी हालत बहुत खराब थी। साँसें तेज़ थीं और मैं रोने लगी। मुझसे उठा भी नहीं जा रहा था।

राज ने मुझे किस किया और कहा, “सॉरी… आपको बहुत दर्द दिया।”

मैं हँसी और बोली, “पागल! तुमने तो मुझे खुश कर दिया।”

वह बोला, “फिर एक और बार हो जाए?”

मैंने कहा, “तू क्या जान लेना चाहता है? मेरी हालत देख… मुझसे नहीं होगा।” उसका लंड अभी भी खड़ा था।

तभी मेरी जेठानी का फोन आया। बोलीं, “तुझे गाँव आना है। यहाँ शादी की तैयारियाँ हैं। तेरी तबीयत तो ठीक है न? इतना हाँफ क्यों रही है?”

मैंने कहा, “कुछ नहीं जेठानी जी… बाहर से घूमकर आई हूँ।” असल में मेरे बड़े देवर की शादी थी, इसलिए गाँव जाना था।

जब मैं थोड़ी सामान्य हुई तो राज का लंड चूसने लगी। उसके बाद उसे शांति मिली। मेरा मुँह और चूत दोनों सूज गए थे।

अब हम गाँव जाने की तैयारी करने लगे। मैंने सोचा—राज को भी साथ ले चलूँगी। मेरी चूत का मन लगा रहेगा।


कहानी का अंत।

By Admin

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