दोस्तो, मेरा नाम राहुल है… और ये नाम भी झूठा है। सच तो ये है कि जो कहानी मैं लिखने जा रहा हूँ, वो मेरी जिंदगी का सबसे काला, सबसे गर्म और सबसे पागलपन भरा सच है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्मा वो लड़का, जो बचपन से ही अपनी माँ की चुदाई देख-देखकर बड़ा हुआ… और आखिर में अपनी ही बीवी को दो-दो लौड़ों के बीच सैंडविच बनाकर चोदने लगा।
मैं जब सिर्फ किशोर था, तबसे मेरे घर में रातें शांत नहीं रहती थीं। पापा अक्सर बाहर रहते थे। और माँ… माँ तो जैसे भूखी शेरनी बन गई थीं। गाँव के दो मर्द बारी-बारी से आते। कभी एक, कभी दोनों एक साथ। मैं छिपकर देखता था—माँ की बड़ी-बड़ी चूचियाँ कैसे हिलतीं, कैसे उनकी गांड पर दो हाथों के निशान पड़ जाते, कैसे वे दोनों लौड़ों को एक साथ अपनी चूत और गांड में समा लेतीं। उनकी आवाज़ें… “आह… और जोर से… दोनों छेद फाड़ दो…” मेरे कानों में गूंजती रहतीं।
एक रात मैं उनके बिस्तर के पास सो गया। माँ की गरम गांड मेरे लौड़े से छू गई। मेरा लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया। माँ जाग गईं। उन्होंने कुछ नहीं कहा… बस अंधेरे में मेरी तरफ देखा। उस नज़र में गुस्सा था, शर्म थी… और कुछ और भी था। उस रात के बाद मैं रोज रात को माँ को याद करके मुट्ठ मारता। उनकी दो लौड़ों वाली चुदाई मेरे दिमाग में घूमती रहती।
फिर जवानी आई। पड़ोस गाँव की लड़की पट गई। पहली बार जब मैंने उसकी चूत फाड़ी, तो वो हचक-हचक कर चुदी। उसके बाद तो जैसे बाढ़ आ गई। बहन की दोनों ननदें… उनकी भरी हुई जवानी देखकर खून उबल पड़ा। एक-एक करके दोनों को चोदा। फिर उनकी मदद से और लड़कियाँ। खेतों में, बागों में, रात के अंधेरे में… गाँव की हर दूसरी चूत मेरे लौड़े की दीवानी हो गई। मैं गाँव का नंबर वन चोदू बन चुका था।
फिर शादी हो गई।
बीवी पहली बार मेरे लौड़े से चुदी तो उसकी चूत का भोंसड़ा बन गया। दर्द में चीखी, रोई… फिर अगली रात खुद लटक-लटकर चुदवाने लगी। लेकिन मेरे अंदर वो पुरानी भूख थी। माँ की वो दो लौड़ों वाली चुदाई भूल नहीं रही थी। एक रात चुदाई के दौरान मैंने बीवी के कान में फुसफुसाया—“एक दिन तुम्हारी भी दोनों छेद एक साथ भरे जाएंगे…”
वो जोश में हां कर गई। लेकिन सुबह उठते ही मना कर दिया।
मैंने हार नहीं मानी। हर चुदाई में वही बात दोहराई। कभी फिल्मी हीरो की कल्पना करवाकर, कभी अपनी जीभ से उसकी चूत चाट-चाटकर जोश बढ़ाया। आखिर एक रात मौका आया।
दोस्त को रात को पीछे के दरवाज़े से घर में छुपा दिया। दोनों खूब दारू पीए हुए थे। बीवी सो रही थी। मैंने उसके पास जाकर चूचियाँ चूसनी शुरू कीं। वो जागी… मस्त होकर कराहने लगी। कपड़े उतारे, चूत चाटी, उंगलियाँ घुसाईं… फिर धीरे से बोला—“आज दो लौड़े लेने का मन है क्या?”
वो जोश में बोली—“हां… बुला लो किसी को…”
मैंने इशारा किया। दोस्त बिस्तर के नीचे से निकला। बीवी की आँखें अभी बंद थीं। मैं उसकी आँखें अपने हाथ से ढककर चूचियाँ चूस रहा था, और दोस्त ने झुककर उसकी चूत में मुँह लगा दिया।
बीवी की आँखें फटी की फटी रह गईं।
“ये… ये कौन…?”
लेकिन चुदास इतनी चढ़ी हुई थी कि वो रोक नहीं पाई। दोस्त की जीभ उसकी चूत में घूम रही थी, और वो कराह उठी—“आह… मत तड़पाओ… चोदो न…”
मैं नीचे लेट गया। बीवी को अपने लौड़े पर बिठाया। उसकी गीली चूत मेरे लंड को पूरा निगल गई। फिर मैंने उसे अपनी छाती से चिपकाया और दोस्त से कहा—“अब गांड में डाल…”
जब दोनों लौड़े एक साथ घुसे—एक चूत में, एक गांड में—तो बीवी की चीख निकल गई। दर्द से उसका शरीर काँप उठा। आँखों से आँसू निकल आए। लेकिन कुछ ही पलों में वो दर्द मजे में बदल गया। उसने टाँगें और चौड़ी कर दीं। “आह… दोनों… और जोर से… फाड़ दो…”
हम दोनों ने उसे दबा-दबाकर चोदा। उसकी चूचियाँ हवा में हिल रही थीं, मुँह से केवल कराहें निकल रही थीं। पहली बार किसी औरत को दो लौड़ों से एक साथ चोदते हुए मुझे भी पागल सा मजा आया।
झड़ने के बाद भी बीवी शांत नहीं हुई। उसने दोनों लौड़ों को एक-एक करके चूसा, हिलाया, फिर से खड़े किए। दूसरी बार हमने फिर से उसकी चूत और गांड एक साथ फाड़ी। इस बार वो खुद जोर-जोर से हिल रही थी। “आज… आज मैं पूरी तरह चुद गई…”
उस रात के बाद बीवी बदल गई। एक बार और दोस्त बुलाया। फिर शहर ले जाकर अलग-अलग मर्दों के साथ थ्रीसम करवाया। अब वो खुद माँगने लगी—“आज दो लौड़े चाहिए…”
दोस्तो, ये कोई कल्पना नहीं। ये मेरी सच्ची कहानी है। माँ की दो लौड़ों वाली चुदाई देखकर जो आग मेरे अंदर जली थी, उसी आग में मैंने अपनी बीवी को भी जला दिया। और सच कहूँ… दोनों ने मिलकर मुझे भी जला दिया।