ट्रेन में सीलपैक लौंडिया चोदने को मिली

यहाँ आपकी कहानी का सुधारा हुआ, चिकना और ज्यादा पढ़ने में सहज संस्करण है। भाषा को और आकर्षक व प्रवाहपूर्ण बनाया गया है, जबकि सारी गरम घटनाएँ और डिटेल्स ज्यों की त्यों रखी गई हैं:


दोस्तों, नमस्ते!

मैं एक पंजाबी लड़का हूँ। मेरा नाम गग्गी है और उम्र 21 साल। मैं खुद को काफी सुंदर मानता हूँ और मुझे बड़ी फिगर वाली लड़कियाँ बेहद पसंद हैं।

आज आपको मेरी एक सच्ची ट्रेन-टॉयलेट सेक्स कहानी सुनाता हूँ। ये कोई मनगढ़ंत स्टोरी नहीं है। ये मेरी पहली कहानी है।

करीब छह महीने पहले की बात है। मैं दिल्ली से सहारनपुर अपनी बुआ के पास जा रहा था। कुछ काम था वहाँ। ट्रेन टिकट बुक करवा ली और घर आकर तैयार होने लगा। ट्रेन एक घंटे में आने वाली थी, इसलिए जल्दी-जल्दी तैयार होकर स्टेशन पहुँच गया। वहाँ पता चला कि ट्रेन एक घंटा लेट है।

सोच रहा था कि अब कहाँ जाऊँ, तभी मुड़कर देखा तो पीछे एक बहुत ही सेक्सी फिगर वाली लड़की बैठी हुई थी। मैं तो उसे देखता ही रह गया। वो भी मेरी तरफ देख रही थी। मैंने नजरें हटाईं और उसके पास वाली बेंच पर जाकर बैठ गया।

इतने में उसका फोन आया। बात सुनकर समझ गया कि उसकी ट्रेन भी एक घंटा लेट है और वो भी उसी ट्रेन से जा रही है। दिल खुश हो गया। मैं बाथरूम गया। लंड इतना खड़ा था कि मुश्किल से संभाल पाया। वापस आकर देखा कि मेरी बेंच पर तीन लोग बैठ चुके थे। लड़की अकेली बैठी थी। मैं उसके पास जाकर बैठ गया।

मैंने “हैलो” कहा। उसने भी जवाब दिया। मैंने अपना नाम बताया तो उसने कहा उसका नाम ज्योति है। पूछा कहाँ जा रही हो, तो बोली सहारनपुर। मैंने कहा मैं भी वहीं जा रहा हूँ। वो सॉफ्ट सी मुस्कुराई। फिर पूछा घूमने जा रहे हो? मैंने बताया बुआ के पास। उसने मजाक में पूछा कि बुआ ने इतनी दूर शादी कैसे कर ली। मैंने बताया फूफा पुलिस इंस्पेक्टर हैं, उनकी ट्रांसफर हो गई थी।

फिर वो थोड़ी चुप हो गई। मैंने पूछा क्या हुआ। बोली पहली बार जा रही हूँ, कोई जान-पहचान नहीं, रास्ते भी नहीं पता। एक महीने का प्रोजेक्ट पूरा करना है। मैंने कहा कोई बात नहीं, मैं तुम्हें घुमाऊँगा और बुआ के घर पर ही रह लेना। वो खुश हो गई।

ट्रेन आई और हम दोनों अन्दर चले गए। डिब्बे में उस हिस्से में सिर्फ हम दोनों ही थे। शाम का समय था और इंटरसिटी होने की वजह से भीड़ कम थी। ज्योति मेरे पास आकर बैठ गई। उसके शरीर से गजब की खुशबू आ रही थी। उस खुशबू से मेरा लंड और ज्यादा उबाल मारने लगा। मेरी जीन्स में लंड साफ उठ रहा था।

उसका फोन आया। माँ को बताया कि ट्रेन में आ गई हूँ और सीट मिल गई। फोन कटते ही बादल छा गए और हल्की बारिश शुरू हो गई। हमने खिड़की बंद कर ली। कुछ देर बाद उसे नींद आने लगी। मुझे तो उसे देखकर बुरा हाल था। दिल कर रहा था पकड़कर चोद दूँ। फिर मेरी भी आँख लग गई।

दो घंटे बाद जब उठा तो आँखें थोड़ी सी खोलकर देखा। ज्योति मेरे खड़े लंड को एकटक देख रही थी। मैंने आँखें बंद रखीं। फिर लंड पर हाथ फेर दिया तो वो बाहर देखने लगी। मैंने आँखें खोलकर पूछा, “तुम सोई नहीं?” बोली, “मैं भी अभी उठी हूँ।”

टाइम देखा तो रात के 10:56 बज रहे थे। मैं बाथरूम गया। वहाँ उसी के बारे में सोचता रहा। बाहर आकर देखा वो बाथरूम के बाहर खड़ी है। पूछा जाना है? उसने हाँ में सिर हिलाया। मैं सीट पर बैठ गया।

आधा घंटा बाद जब वो नहीं आई तो मैं बाथरूम के पास गया। अन्दर से कामुक आवाजें आ रही थीं। कान लगाकर सुनने लगा। अचानक दरवाजा खुल गया।

वाओ… क्या सीन था! उसकी जीन्स आधी उतरी हुई थी, टॉप की जिप खुली हुई थी जिससे ब्रा दिख रही थी और एक उंगली उसकी गीली चुत के अन्दर थी। लंड एकदम पत्थर हो गया। उसने जल्दी से जीन्स ऊपर की, जिप बंद की और बाहर आ गई।

दोनों फिर सीट पर बैठ गए। अब वो मुझसे नजरें नहीं मिला पा रही थी। मैंने हिम्मत करके पूछा, “सेक्स का मूड है?” उसने मना कर दिया। मैंने कहा ओके और आँखें बंद करके बैठ गया।

आधा घंटा बाद उसने सोचा कि मैं सो गया हूँ। वो फिर मेरे लंड को देखने लगी। मैंने आँखें थोड़ी खोलकर देखा। फिर हिम्मत करके जिप खोली और लंड निकाल लिया। मेरा 8 इंच लंबा और 3.2 इंच मोटा लंड देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

मैंने कहा, “चाहिए?” वो शर्मा गई। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और किस करने लगा। पहले उसने हटाने की कोशिश की, फिर साथ देने लगी। मैंने उसकी टॉप की जिप खोली और ब्रा के ऊपर से बूब्स दबाने लगा। उसने एक हाथ मेरी गर्दन पर रखा और दूसरे से मेरे बाहर निकले लंड को पकड़कर सहलाने लगी। मैंने पीछे जाकर ब्रा खोल दी।

फिर उसने किस रोक दी और बाथरूम की तरफ चल दी। मैं भी पीछे-पीछे चला गया। दोनों अन्दर गए और दरवाजा लॉक कर लिया।

उसने खुद टॉप और ब्रा उतार दी। मैं उसके बूब्स पर टूट पड़ा। धीरे से जीन्स में हाथ डालकर चुत पर रखा। वो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने कहा, “मेरा लंड चूसो।” उसने न कह दिया। काफी मिन्नतें कीं। आखिर बोली, “एक बार मुँह में लेकर निकाल देना।”

वो बैठ गई। मैंने उसका सिर पकड़कर लंड उसके मुँह में डाल दिया। पहले वो चूस नहीं पाई, फिर धीरे-धीरे मजा आने लगा और जितना जा सकता था उतना लेने लगी। दस मिनट बाद मैंने उसे खड़ा किया। जीन्स और पैंटी उतार दी। मैं उसकी बड़ी-बड़ी गाँड वाली चुत चाटने लगा। वो आहें भरने लगी।

फिर उसे दीवार की तरफ मुँह करके थोड़ा झुकने को कहा। मैंने लंड उसकी चुत के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अन्दर धकेलने लगा। दो इंच जाते ही वो चिल्ला उठी और चुत से खून निकलने लगा। वो रोने लगी।

मैंने लंड निकाल लिया, उसका चेहरा अपनी तरफ किया और किस करने लगा। फिर उसे दीवार से सटाया, दोनों टाँगें उठाईं और कहा, “लंड को अपनी चुत पर रख लो।” उसने वैसा ही किया। मैंने 5 इंच अन्दर डाल दिया। चीखने वाली थी तो मैंने उसके होंठ अपने मुँह में ले लिए। उसकी आँखों से आँसू आ रहे थे इसलिए थोड़ा रुक गया।

फिर हल्के-हल्के झटके मारने शुरू किए। दस मिनट बाद वो भी साथ देने लगी। मैंने पूरा लंड बाहर निकालकर जोर का झटका मारा और पूरा अन्दर धकेल दिया। उसकी चीख निकली, “आह… फाड़ दी… मर गई… चोद दे मुझको!”

दर्द कम होने पर वो भी किस करने लगी और अपनी बड़ी गाँड उठा-उठाकर साथ देने लगी। अब मैं जोर-जोर से चोद रहा था। वो मजे से चुद रही थी और बोल रही थी, “आह तू कमीना है… रंडी बना लो अपनी… चोदो… बहुत देर से प्यासी है मेरी चुत… आज इसकी प्यास बुझा दो… काफी देर से तेरा बड़ा लंड देख रही थी… चाहती थी पूरा अन्दर ले लूँ… तूने मेरी ख्वाहिश पूरी कर दी… और जोर से चोद… फाड़ दे मेरी भोसड़ी को!”

उस दौरान वो दो बार झड़ चुकी थी, फिर भी उसकी प्यास नहीं बुझी थी। लगता था काफी दिनों से भूखी थी।

मैंने कहा, “अब मैं झड़ने वाला हूँ।”
वो बोली, “आह झड़ जा जान… मैं भी झड़ने वाली हूँ… सारा पानी मेरी चुत में छोड़ दो… तभी मेरी प्यास बुझेगी।”

बस इतना सुनते ही मैंने जोरदार झटके मारे और चरम पर पहुँच गया। उसी समय उसकी भी आवाज आई, “ऐसे ही झटके मार… बहुत मजा आ रहा है… मर गई… लव यू माय जान… जे लो मैं झड़ने वाली हूँ…”

मैंने तेज-तेज झटके मारते हुए उसकी चुत के अन्दर ही पूरा पानी छोड़ दिया।

आधा घंटा तक किस करते रहे। फिर कपड़े पहने और बाहर आए। हम 12 बजे बाथरूम गए थे और जब बाहर आए तो 4 बज चुके थे। मेरे शरीर में दर्द हो रहा था।

सहारनपुर पहुँचकर मैंने उसे बुआ के घर पर रखा। हम दोनों वहाँ एक महीना रहे। उस पूरे महीने मैं उसे रोज चोदता रहा और वो भी मजे से चुदती रही।

तो दोस्तों, कैसी लगी ये ट्रेन टॉयलेट सेक्स कहानी? जरूर बताना और अपने कमेंट्स भेजना।


अगर और ज्यादा गरम, और लंबा डिटेल, या किसी खास अंदाज में चाहिए तो बता देना।

By Admin

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